श्री गंगा आरती (Shri Ganga Aarti)

ravi shankar
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 श्री गंगा आरती (Shri Ganga Aarti)



॥ श्री गंगा मैया आरती ॥

नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्,

सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।

भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं,

भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥

॥ shree gngaa maiyaa aaratee ॥

namaami gnge ! Tav paad pnkajam,

suraasuraiah vndit divy roopam .

 Bhaktim muktin ch dadaasi nityn,

bhaavaanusaareṇa sadaa naraaṇaam ॥

हर हर गंगे, जय माँ गंगे,

हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥

Har har gnge, jay maan gnge,

har har gnge, jay maan gnge ॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता,

मनवांछित फल पाता ॥

Om jay gnge maataa,

shree jay gnge maataa . 

Jo nar tumako dhyaataa,

manavaanchhit fal paataa ॥


चंद्र सी जोत तुम्हारी,

जल निर्मल आता ।

शरण पडें जो तेरी,

सो नर तर जाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

Chndr see jot tumhaaree,

jal nirmal aataa . 

Sharaṇa paḍaen jo teree,

so nar tar jaataa ॥

॥ om jay gnge maataa..॥

पुत्र सगर के तारे,

सब जग को ज्ञाता ।

कृपा दृष्टि तुम्हारी,

त्रिभुवन सुख दाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

Putr sagar ke taare,

sab jag ko gyaataa . 

Kripaa driṣṭi tumhaaree,

tribhuvan sukh daataa ॥

॥ om jay gnge maataa..॥

एक ही बार जो तेरी,

शारणागति आता ।

यम की त्रास मिटा कर,

परमगति पाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

Ek hee baar jo teree,

shaaraṇaagati aataa . 

Yam kee traas miṭaa kar,

paramagati paataa ॥

॥ om jay gnge maataa..॥

आरती मात तुम्हारी,

जो जन नित्य गाता ।

दास वही सहज में,

मुक्त्ति को पाता ॥

॥ ॐ जय गंगे माता..॥

Aaratee maat tumhaaree,

jo jan nity gaataa . 

Daas vahee sahaj men,

muktti ko paataa ॥

॥ om jay gnge maataa..॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

जो नर तुमको ध्याता,

मनवांछित फल पाता ॥

Om jay gnge maataa,

shree jay gnge maataa .

 Jo nar tumako dhyaataa,

manavaanchhit fal paataa ॥

ॐ जय गंगे माता,

श्री जय गंगे माता ।

Om jay gnge maataa,

shree jay gnge maataa .

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